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I am not your mystery woman, I am not your muse..I am not your soulmate, just a passionate woman looking for her own peace of mind... Heart is a lonely hunter!!! "Within us there is someone who knows everything, wills everything, does everything better than we ourselves"~I guess this is Hermen Hesse

Thursday, September 18, 2014

तुम आये...

कुछ अजीब सी कैफ़ियत है दिल की
जबसे तुम्हारी आँखें मेरी आखों से मिली हैं

तुम
दो आँखें है, दो प्यारे हाथ हैं (जो जब न तब मेरे बालों को खींच लेते हैं)
तुम्हारी मीठी साँसें हैं
बस यही धूरि है मेरी अब
तुम से, तुम तक ही..
मेरे दिन और रात हो गए हैं

किसी से सुना  था,
प्यार जब होता है तब ही खुद के दिल की गहराइयाँ पता चलती हैं
ये अब समझ आया है,
तुम तो लगता है मेरी आत्मा तक पहुँच गए हो
वो भी बिना कुछ बोले

शायद मेरी शकल भी अभी तुम्हारी जेहन में सही आकार नहीं ले पायी होगी
पर कभी कभी  तुम्हारी आँखें यूँ कहती हुई लगती हैं
कि चाहे मैं तुम्हें पेह्चानूं या ना पेह्चानूं
तुम्ही मेरी ख़ास लड़की हो

घर बहार, बाजार
हर तरफ तुम्हारा छोटा सा चेहरा दिखता है
मेरे अंदर की छिपी ख़ुशी को तुम्हारी शक्ल मिल गयी है

मेरे बच्चे , मेरे गुड्डे
मेरे दिल को तुमने बड़ा कर दिया और वहां प्यार ही प्यार भर दिया
जिंदगी ने एक और मौका दिया है , जिंदगी को अपने घर लाने का
अब जिंदगी चाहे जहाँ ले जाये, चाहे जो दिखाए
हम और तुम मिलके सब आसान कर लेंगें




होगा क्या हम ना जानें , नयी भर लें उड़ानें...
जज्बात ने पर हैं फैलाये , तुम आये 



4 comments:

संजय भास्‍कर said...

ऐसी कवितायें रोज रोज पढने को नहीं मिलती...इतनी भावपूर्ण कवितायें लिखने के लिए आप को बधाई...शब्द शब्द दिल में उतर गयी.

Appy said...

:)
Maa suna rahi thi and I had a smile on my face listening to it... :)

रश्मि प्रभा... said...

जब मासूम ज़िन्दगी अपने हाथों में,
अपनी शक्ल में मुस्कुराती है
तो जीवन के मायने बदल जाते हैं...
बचपन नए सिरे से दौड़ लगाता है!
कहाँ थे कंकड़, पत्थर?
कहाँ थी काई ?
वर्तमान में जीवंत हो जाते हैं॥
नज़रिये का पुनर्आंकलन
मासूम ज़िन्दगी से जुड़ जाते हैं...
जो हिदायतें अभिभावकों ने दी थी
वो अपनी जुबान पर मुखरित हो जाते हैं!
हमने नहीं मान कर क्या खोया
समझने लगते हैं
नज़र, टोने-टोटके पर विश्वास न होकर भी
विश्वास पनपने लगते हैं!
"उस वृक्ष पर डायन रहती है...."
पर ठहाके लगाते हम
अपनी मासूम ज़िन्दगी का हाथ पकड़ लेते हैं
"ज़रूरत क्या है वहाँ जाने की?"
माँ की सीख, पिता का झल्लाना
समय की नाजुकता समय की पाबंदी
सब सही नज़र आने लगते हैं!
पूरी ज़िन्दगी के मायने
पूरी तरह बदल जाते हैं

WomanInLove said...

Sanjay Bhaskar - Thank you for your appreciation, and welcome to my blog.e

Anku - :) we all have brought such smiles to pur mother's faces sometime

Minni mausi - ek aurat fir se janm leti hai apne bachche ke saath, ye kahawat ab samjh mein aayi hai.
Dar, ghabrathat, pyaar, pride, chinta, hopes..har feeling apne charam pe pahunch jaati hai apne bachche ke saath