मुझे मत उटकेरो
बहुत जतन से बुना है मैंने खुदको
एक नहीं, कई बार..
मत उधेड़ो मुझे,
सिर्फ अपनी तन्हाइयों को मेरे रेशों से भरने के लिए
बड़ी मुश्किल से दिल और दिमाग के तारों को सुलझती हूँ मैं ,
एक दिन नहीं , रोज़.…
रात चिंताओं को बुनती हूँ
सुबह अधूरे ख्वाब
ख्वाब से ख्वाब का सफर
तय करती हूँ रोज
ख़ुशी निचोड़ना चाहती हूँ
अपने हर पल से
बेधड़क हँस के , बेमानी लतीफों पे
बहुत ज़्यादा मांगा था कभी ज़िन्दगी से
अभी सिर्फ इतना ही मांगती हूँ
बहुत जतन से बुना है मैंने खुदको
एक नहीं, कई बार..
मत उधेड़ो मुझे,
सिर्फ अपनी तन्हाइयों को मेरे रेशों से भरने के लिए
बड़ी मुश्किल से दिल और दिमाग के तारों को सुलझती हूँ मैं ,
एक दिन नहीं , रोज़.…
रात चिंताओं को बुनती हूँ
सुबह अधूरे ख्वाब
ख्वाब से ख्वाब का सफर
तय करती हूँ रोज
ख़ुशी निचोड़ना चाहती हूँ
अपने हर पल से
बेधड़क हँस के , बेमानी लतीफों पे
बहुत ज़्यादा मांगा था कभी ज़िन्दगी से
अभी सिर्फ इतना ही मांगती हूँ
